मेरी नई कहानी।
नमस्ते दोस्तो। आप सबने मेरी कहानी "बारिश - दास्तान इश्क की" बहोत ही कम समय में बोहोत प्यार दिया है। में दूसरी धारावाहिक "ले डूबा इश्क तेरा" लिखने जा रही हूं। आशा करती हूं की ईसे भी पढ़कर अपने प्रतिभाव देंगे।
मेरी इस नई कहानी के पात्र नीचे दिए गए है।
"ऋषित राव" जिसे प्यार से सब ऋषि कहते है। जो बचपन में अपने मां, बाप को खो चुका है। दादा, दादी और चाचा, चाची के साथ पला बढ़ा है। उसे अपने दम पर कुछ कर दिखाने की चाह है। एसडीएम कोलेज के दुसरे वर्ष में वह अभ्यास करता है। ज्यादातर घर से दूर रहता है। मस्ती करना, फ्रेंड्स के साथ घूमना फिरना बेहद पसंद है। फूल एटीट्यूड रखता है। अपने से बड़े-बड़े लोगों की इज्जत करता है। बड़े लोग गलत होते हैं तो उन्हें सच का आइना दिखा देता है। वह अपनी जिंदगी अपने उसूलों पर जीता है। मेरी कहानी का हीरो है।
"माहिरा शर्मा" ब्यूटी विथ ब्रेन, सीधी सादी गांव की लड़की, जिसे बचपन से ही संकुचित मानस और ग्रामीण वातावरण में पाला गया है। उसके सपने बहुत बड़े हैं। पढ़ाई करने के लिए वह काफी कुछ सहन करके इस मुकाम पहुंची है। रूढ़िवादी परिवार में पली बढ़ी माहिरा की सोच आधुनिक है। वह भी दूसरे लड़के लड़कियों की तरह कॉलेज लाइफ जीना चाहती है। पर पहले वह अपने सपनों को प्रायोरिटी देती है। वह भी शहर की टॉप एसडीएम कोलेज में अपनी महेनत से दाखिल हुई है। उसका कोलेज का पहला साल है। जो इस कहानी की हिरोइन है।
"नरोतम और मालिनी राव " ऋषित के दादा, दादी। वे पुराने और नए विचारों के तालमेल में मानते है। भारतीय परंपरा में विश्वास रखते हैं।
"तिलक और तुलसी राव" ऋषित के चाचा चाची। जितना अपने बच्चों से प्यार करते है उतना ही ऋषि से प्यार करते है। वह ऋषि की हर जिद्द पूरी करते है।
"मान्या और किशोर" ऋषित के चाचा चाची तिलक और तुलसी की संतानें। ऋषित और किशोर दोनों एक ही उम्र के है। दोनों बचपन से साथ रहे है। किशोर के लिए ऋषि भगवान राम तुल्य है। दोनों की अच्छी बॉन्डिंग है।
"बृजमोहन और शंकुतला देवी शर्मा" माहिरा के माता पिता। बृजमोहन काफी साल से गांव के सरपंच रह चुके है। इस बार उनकी पत्नी को चुनाव में खडा कर भारी बहुमत से विजयी हासिल की। पत्नी नाम की ही सरपंच है, कारभर सारा बृजमोहन संभालते है। उनकी नज़र में ओरत की शोभा घर में होती है, चूला चौका करते ही औरते अच्छी लगती है। बेटी को आगे पढ़ने से मना कर दिया फिर भी माहिरा ने जैसे तैसे करके पिता को मनवा ही लिया।
शकुंतला देवी चाहती है कि जिस तरह उनका जीवन रसोईघर में बीत गया। उस तरह का जीवन उनकी बेटी ना जिए। वह माहिरा के सपने पूरे करने के लिए उसका साथ देती हैं। वह पति के डर के कारण उनके सामने माहिरा का पक्ष नहि ले पाती। वह भी सात तक पढ़ी है। पढ़ना, लिखना अच्छे से आता है। पर पति के सामने ये सब बोलने की उनमें हिम्मत नहीं हैं।
"कल्याण शर्मा" माहिरा का बड़ा भाई, बिल्कुल अपने पिता की परछाई है। पिता उसे पढ़ा लिखा कर अफसर बनाना चाहते थे। पर कल्याण ने कई सब्जेक्ट में फ़ैल होने के कारण पढ़ाई छोड़ दी। वह थोड़ा अंहकारी है।
"रोकी, राहुल, रिया, रितु" ये चारों ऋषित के दोस्त है। एक ही क्लास में पढ़ते है। ऋषि के बुरे, अच्छे सारे काम में ये लोग साथ देते है। कोलेज यह पांच लोग और छठ्ठा किशोर। इन सबको गुलाबी गैंग जैसे विचित्र नाम से बुलाती है। इन सबकी दोस्ती बोहोत गहरी है।
"ध्याना ओर कीर्ति" माहिरा की कोलेज में मिली अच्छी दोस्त है। जो हॉस्टल में भी साथ में रहते है।
जल्द मिलते है ऋषि और माहिरा की कहानी के साथ।🥰😊🤗