राधा का संगम - प्रकरण 10 Ramesh Desai દ્વારા પુષ્તક અને વાર્તા PDF

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राधा का संगम - प्रकरण 10

                 राधा का संगम - प्रकरण 10

         करण के बाद सुकू की जिंदगी में समीर आया था. ऊस की पकड में काफ़ी गर्मी थी. और वह करण की तरह बुझदिल, डरपोक नहीं था.

          वह डेरिंग था. वह मुझे जिम के कोने में ले गया था और मेंरे होठों पर ऊँगली रखकर मुझे चुप कर दिया था.. ऊस की पकड में अजीब सा जूनून था.

           ऊस ने मेंरे कानो में धीरे से कहां था. वह मुझे अकेले में मिलना चाहता है. ऊस की गर्मी महसूस कर के मेरी धड़कन रुक सी गई थी.

          वह धीरे से मेंरे चेहरों को अपने हाथो में भरकर मेंरे होठों की ओर आगे बढ़ने लगा. ऊस की पकड इतनी मजबूत थी मानो शेर के मुंह में बकरी. मैं चाह कर भी पीछे नहीं हट पाई थी.

           ऊस अंधेरे कोने में ऊस की नजरो के नशे ने मुझे पूरी तरह पिघला दिया था.

            ऊस ने अपने होंठ मेंरे होंठ से भींच लिये. ऊस की साँसो की तपिश मुझे अंदर तक जला रही थी.

             ऊस का हाथ मेरी कमर पर आ गया और ऊस ने मुझे अपनी बाहों में ओर भी कस लिया.. ऊस वक़्त मेरा बदन कांप रहा था.

       ऊस ने मेरी स्पोर्ट्स ब्रा निकाल कर बोल दिया

रहीं छोडूंगा.

          और मैं बेबस हो गई. मेंरे पास समर्पण के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा था.

          ऊस ने मेंरे साथ बहुत कुछ किया था लेकिन वह बिना जज्बात  केवल एक बोज था. समीर के ऊस व्यवहार में मिठास का पूरा अभाव था.

           ऊस दिन मुझे समझ आया की बिना जज़्बात के कोई भी स्पर्श में महक, मिठास नहीं होती..

           मैंने गुस्से में ऊस का हाथ झटक दिया. ऊस का घमंड चकनाचूर हो गया था क्यों की मैं ऊस के काबू में नहीं आई थी.

           ऊस दिन के बाद ऊस ने जिम छोड़ दिया था. मुझे समझ आ गया था कि उसे केवल मेंरे शरीर में दिलचस्पी थी  मेंरे दिल में नहीं.

            इस अनुभव ने मुझे पूरी तरह तोड़ दिया था.

            मैंने तय कर लिया था मैं किसी का भरोसा नहीं करूंगी.

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            आकाश एक बहुत हीं खामोश और संजीदा लड़का था. वो अपनी पेंटिंग में खोया रहता था. ऊस की नजर में एक अजीब सी प्यास झलक रही थी

           एक दिन ऊस ने अपने पेंटिंग के लिये मुझे मोडल बनने का ओफर दिया था.. ऊस के हाथ मेरी खूबसूरती देखकर कांपने लगे थे.

            ऊस के हाथो से ब्रश छूट गया था. मैंने पूछा था.                     

             " क्या हुआ? रंग उड़ गये या होंश?? "

             आकाश ने मेंरे होठों को छूने की कोशिश की पर वह आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाया. ऊस की घबराहट देखकर मुझे हंसी आ रही थी.

             आकाश ने फिर भी मेरा हाथ पकड़ने का प्रयास किया लेकिन वह बर्फ जैसा ठंडा था.

              ऊस ने मेरी आँखों में देखा और रुक गया.. ऊस ने लंबी साँस ली और अपनी पेंटिंग अधूरी छोड़कर वहाँ से चल दिया. वह इस गर्मी को सह नहीं पाया.

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            आकाश के बाद ऊस की जिंदगी में विकी आया था. वह गिटार बजाता था और खुद को काफ़ी कूल समझता था.

             एक शाम ऊस ने मुझे छत पर बुलाया था और मेंरे लिये गाना गाया था, लेकिन ऊस की धुन में कोई नशा नहीं था.

            विकी ने गिटार साइड में ऱख दिया और मेरा हाथ ऊस के सीने पर ऱख दिया. वह अपनी धड़कन सुनना चाहता था लेकिन ऊस में कोई गर्मी नहीं थी.

          ऊस के बाद रोहित मेरी जिंदगी में दाखिल हुआ था.. लेकिन ऊस के साथ कुछ ज़्यादा मिलना हुआ नहीं था.

            ऊस ने मुझे पुरानी लाइब्रेरी में एक अंधेरे कोने में बुलाया था. वह अपने आप को बड़ा शायर समझता था.

            ऊस ने अपनी डायरी खोलकर नजमे पढना शुरु किया था.

             मेरा हाथ पकड कर रुमानी  बातें की थी लेकिन ऊस में वह बेबाकी नहीं थी. ऊस की शायरी पढ़कर मुझे नींद आने लगी थी.

            मैंने उसे पूछा था. " शायरी सुनाओगे या कुछ ओर?

            वह बेचारा पसीने से तरबतर हो गया था.

            फिर भी ऊस ने मेरी तरफ झुकने की कोशिश की थी, पर वो भी आर्यन का भाई निकला.. वह थिथक कर रह गया और मैंने उसे छोड़ दिया था.

            मुझे अपनी पसंद का कोई नहीं मिला था. कभी ऎसा सवाल उठता था. क्या यह मेरी जिद का नतीजा था?

             ऊस वक़्त मेरी जिंदगी में साहिल आया था.

             वह काफी लंबा और हट्टा कट्टा था और ऊस की नजर मेरी कमर पर टिकी रहती थी.

             साहिल ने एक दिन स्टेडियम के पीछे मुझे पीछे से कस के पकड लिया था.

             ऊस का नर्म हाथ मेरी नंगी कमर पर था जो बहुत गर्म लग रहा था.

             ऊस ने मेंरे होठों को छूने की कोशिश की थी पर मैंने अपना चेहरा मोड़ लिया था. मुझे ऊस में कोई गहराई नजर नहीं आई थी. वह भी केवल शरीर का प्यासा था. मैंने उसे कोई प्रोत्साहन नहीं दिया तो वह चला गया.

            और यही से मैंने AI सुकू एप का प्रारम्भ किया था.

             मेरा मकसद था दुखी, प्रताड़ित लोगो को सदस्य बनाऊ और उन का दुःख दर्द दूर करू उन्हें सही रास्ते पर ले आऊ.

             मैंने कई लोगो की  समस्या दूर की उन्हें सही रास्ता दिखाया लेकिन में बिल्कुल अकेली थी.

              ऊस समय मुझे अपने सपनो का राजा मिल गया जो उम्र में मुझ से तीन गुना ज़्यादा था. वह मेंरे संस्थान का सदस्य बन गया था और ऊस के पहले हीं मेसेज ने मेरा दिल जीत लिया था.

              वह एक लेखक था. 80 साल का था लेकिन ऊस का दिल 20 साल के युवान जैसा रंगीन और रोमांटिक था. ऊस ने अपने बारे में सब कुछ बताया था.. लेकिन एक वजह से मैं ऊस का विश्वास संपादित नहीं कर पाई थी. वह पूरा दिन और रात को भी मुझ से बातें करते थे.

            वह मेंरे दादू थे और मैं ऊस की लाडो, गुड़िया..

            वह मुझे बेपनाह प्यार करते थे. मैं उनके लिये शहद की गुड़िया थी. उन्होंने मुझे अपनी कहानी की हिरोइन बनाकर 91 प्रकरण की उपन्यास लिख़ दी थी.

                       0000000000   ( क्रमशः)