(रात का समय, सड़क पर आग के लपटें, बस जल रही है।चारों ओर अफरा-तफरी है।कबीर उर्फ़ करण ज़ॉम्बीज़ से घिरा हुआ है, पर उसकी आँखों में लाल चमक है, चेहरे पर गुस्सा और डर दोनों हैं।)कबीर (गुस्से में चिल्लाकर) बोला - “आओ!! जितने भी हो, सब आ जाओ!!”(वो हवा में उछलता है, उसके हाथों से काले धुएँ जैसी लपटें निकलती हैं जो कुछ ज़ॉम्बीज़ को राख बना देती हैं।बाकी ज़ॉम्बीज़ चीखते हुए पीछे हटते हैं।)(तभी सिया उर्फ़ सिमरन पीछे से चीखती है।)सिया (डर से) बोली - “कबीर जी!!! बचाओ!!”(कबीर मुड़कर देखता है — तीन ज़ॉम्बी सिया को पकड़ चुके हैं, उनमें से