sukhvinder Singh Rai ની વાર્તાઓ

अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 3

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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**भाग तीन: फ़ासले दिलों के**अगले दिन की दोपहर बेहद उमस भरी थी। आसमान में मटमैले बादल डेरा डाले हुए ...

मकोड़ों का कर्ज: इंसान की बेईमानी

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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पंजाब के एक शांत गाँव में, हल्की सर्द शाम ढल रही थी। आर्यन और रिया खेतों के किनारे पगडंडी ...

अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 2

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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पल्लवी के मुँह से निकली उस कांपती हुई आवाज़—"मेरा हाथ छोड़ दो"—के बाद, सड़क के उस किनारे पर छाई ...

कांच के टुकड़े, बिखरे सपने - भाग 4

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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कांच के टुकड़े बिखरे सपने: भाग 4रिया की शादी की तारीख नज़दीक आ रही थी और उधर आर्यन की ...

अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 1

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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चाय की एक मशहूर दुकान के सामने, शहर की व्यस्त सड़क पर गाड़ियों का शोर अपने चरम पर था। ...

कांच के टुकड़े, बिखरे सपने - भाग 3

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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रात का सन्नाटा अभी भी रिया के कमरे में पसरा हुआ था, लेकिन उसकी धड़कनें अब भी तेज़ थीं। ...

गौरी का 'बुलेट' अवतार

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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खेतों में सुबह की सुनहरी धूप फैली थी। ताजी हवा में मिट्टी की सोंधी-सोंधी खुशबू थी। आर्यन और रिया ...

कांच के टुकड़े, बिखरे सपने - भाग 2

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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शाम ढल चुकी थी। घर में एक अजीब सी खामोशी पसरी थी, जैसे कोई बड़ा तूफान आने वाला हो। ...

कांच के टुकड़े, बिखरे सपने - भाग 1

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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शहर की भीड़भाड़ से दूर, एक संकरी गली के कोने में बना वह छोटा सा कैफे, 'द ओल्ड ओक', ...

एक घरवाली, चार बाहरवाली

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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### **धोखेबाज़ राहुल: एक घरवाली, कई बाहरवाली** ️शाम के ढलते सूरज की नारंगी रोशनी दिल्ली के उस शांत पार्क ...