रात अब और भी गहरी हो चुकी थी। अंधेरा इतना सघन था कि मानो वह रितांश के चारों ओर ...
वो पल…चारों के लिए जैसे समय को रोक देने वाला था…शिवांश…करण से लिपटा हुआ था…और शिवांशी…कबीर की उंगली पकड़कर ...
(पुराना वीरान शहर, जहाँ कभी "अमृत प्रोजेक्ट" की लैब हुआ करती थी। धुंध फैली हुई है। हवा में राख ...
रात गहरा चुकी थी। पार्टी धीरे-धीरे खत्म होने वाली थी, लेकिन विराट का मन कहीं और था। वह एक ...
रात गहरी हो चुकी थी। अग्निहोत्री हाउस में शादी की सारी रस्में पूरी हो चुकी थीं। पूरा घर थकान ...
समय बीतता गया…लेकिन उस फैसले का असर हर दिन गहरा होता गया…शिवांशी अब 5 साल की हो चुकी थी…उसकी ...
पार्टी पूरे जोश में चल रही थी। संगीत बज रहा था और ऑफिस के कर्मचारी डांस फ्लोर पर आकर ...
सुबह का समय — हवा में धुंध, जंगल के पेड़ों के बीच से सूरज की किरणें छनकर आ रही ...
अगली सुबह ऑफिस में सब कुछ सामान्य लग रहा था। शैलजा चुपचाप अपनी सीट पर बैठी थी। वो कल ...
सुबह हो चुकी थी…खिड़की से आती धूप कमरे में फैलरही थी…लेकिन उस रोशनी में भी एक अजीब-सी उदासी थी। ...