दास्ताँ-ए-मोहब्बत कुछ मुलाक़ातें तक़दीर का पैग़ाम बन जाती हैं,कुछ अनजान सूरतें दिल में सवाल बन जाती हैं।कहाँ मालूम था ...
दास्ताँ-ए-मोहब्बत कुछ रिश्ते दिल से नहीं, किस्मत से जुड़ते हैं… और कुछ लोग किस्मत में तो लिखे होते हैं, ...