RAAHULL SHARMA ની વાર્તાઓ

अमावस्या की काली रात एक खोफ या श्राप - 6

by RAAHULL SHARMA
  • 231

कृष्ण जैसे ही हवेली की दहलीज पर पहुँचा, उसने चिल्लाकर कहा, "दरवाज़ा बंद करो! अभी के अभी सारे दरवाज़े ...

प्रतिशोध द घोस्ट ऑफ कोलकाता - 5

by RAAHULL SHARMA
  • 276

अग्निश का हाथ अभी भी दिग्विजय के कॉलर पर था, तभी कमिश्नर भाटी की भारी आवाज़ गूँजी।"अग्निश साहब, हाथ ...

अवनि एक अटूट विश्वास - 5

by RAAHULL SHARMA
  • 324

अवनि ने अपनी चोटिल उंगली पर पट्टी बाँधते हुए कान्हा की मूरत को निहारा। उसकी आँखों में आंसू नहीं, ...

शैतानी घाटी का सफर - 9

by RAAHULL SHARMA
  • 411

वह देख रहा था कि सृष्टि का लॉकेट अब ठंडा पड़ने लगा था, क्योंकि उसका दिमाग अब इन सायों ...

कालू की पहाड़ी - 10

by RAAHULL SHARMA
  • 936

खंडहरों की ओर बढ़ते कार्तिक के कदम एक बार फिर ठिठक गए। इस बार जो आवाज़ आई, वह रूही ...

1926 की अमावस की वो खौफनाक रात - 5

by RAAHULL SHARMA
  • 1.1k

राजकुमार को जिंदा छोड़ने के बाद रूपमती की रूह हवा में लहराई। उसकी सफेद आँखों में एक आखिरी बार ...

बेगूसराय द डार्क सिंडिकेट - 4

by RAAHULL SHARMA
  • 810

कंटेनर की तलाशी ले रहे थे, लेकिन वह 'मशीनरी' वाला कंटेनर कहीं नहीं था।अभिमन्यु: "मैडम, हमने पिछले 2 घंटों ...

रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 4

by RAAHULL SHARMA
  • (0/5)
  • 798

रोशनी को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके सीने में खंजर उतार दिया हो। जिस आदमी ने उसे हवस ...

शैतानी घाटी का सफर - 8

by RAAHULL SHARMA
  • 1.1k

अब मुझे यकीन हो गया है कि अगला नंबर हम दोनों का ही है। शायद हम इस घाटी से ...

अमावस्या की काली रात एक खोफ या श्राप - 5

by RAAHULL SHARMA
  • 1k

सृष्टि पाँचवीं मंज़िल की उस जर्जर छत के किनारे पर खड़ी थी। उसके बाल हवा में लहरा रहे थे ...