Rishav raj ની વાર્તાઓ

Ghost hunters - 20

by Rishav raj
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पेड़ की दरार एक झटके में पूरी तरह फट गई और उसके भीतर कैद वह विकृत आकृति भारी आवाज ...

प्यार की परीभाषा - 9

by Rishav raj
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अगली सुबह घर में हमेशा की तरह जल्दी हलचल शुरू हो गई रसोई से तवे पर सिकती रोटियों की ...

प्यार की परीभाषा - 8

by Rishav raj
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तुषार अपने कमरे में खड़ा था। हाथ में प्रेस थी, लेकिन उसका ध्यान कपड़ों पर नहीं, कहीं और भटक ...

Ghost hunters - 19

by Rishav raj
  • 942

हवा में अब स्थिरता नहीं थी वो काँप रही थी जैसे दो अदृश्य ताकतें एक-दूसरे को धकेल रही हों ...

प्यार की परीभाषा - 7

by Rishav raj
  • 831

ज्वेलरी शॉप से बाहर निकलते-निकलते शाम ढलने लगी थी। दिन भर की भागदौड़ के बाद दोनों परिवारों के चेहरों ...

Ghost hunters - 18

by Rishav raj
  • 918

दोपहर की रोशनी धीरे-धीरे ढल रही थी, लेकिन पेड़ के आसपास समय जैसे ठहर गया था मंडल पूरा हो ...

प्यार की परीभाषा - 6

by Rishav raj
  • 1k

मंदिर वाली मुलाकात के बाद चीज़ें उम्मीद से ज़्यादा जल्दी आगे बढ़ गईं। दोनों परिवारों के बीच दो-तीन बार ...

Ghost hunters - 17

by Rishav raj
  • 939

दोपहर ढल रही थी सूरज की रोशनी पेड़ तक पहुँच तो रही थी लेकिन उसके नीचे खड़े लोगों तक ...

प्यार की परीभाषा - 5

by Rishav raj
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तुषार के घर में उस दिन माहौल थोड़ा अलग था महेश सुबह से ही खाँस रहे थे। पहले तो ...

Ghost hunters - 16

by Rishav raj
  • 951

हवा अब पहले जैसी नहीं रही थी। उसमें ठंड के साथ एक गंध भी थी जली हुई चीज़ों की ...