Nitya Oswal ની વાર્તાઓ

अमृत वाणी - संत वाणी - 38

by Nitya Oswal
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“दादू इस संसार में, दोई रत्न अमोल।एक साईं एक संत है, जे कोई जानै तोल॥”गहरे अर्थ की व्याख्यासंत दादू ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 37

by Nitya Oswal
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“संसार की चिंता छोड़ो और यह खोजो कि यह चिंता करने वाला ‘मैं’ कौन हूँ? जब तक अहंकार जीवित ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 36

by Nitya Oswal
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मक्खी बैठे शहद पर, पंख रहे लपटाए।रज्जब विकल होय धुने सिर, हाथ मले पछताए॥संत रज्जब जी समझाते हैं कि ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 35

by Nitya Oswal
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“भीखा बात अगम की, कहन सुनन की नाहिं।जो जाने सो कहे नहीं, कहे सो जाने नाहिं॥”संत भीखा साहब कहते ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 34

by Nitya Oswal
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“रे बंदे तू काहे के तोत दिवाना।काल अचाका पकरिहै तोहीं, जैहैं प्रान पराना॥”संत धरणीदास जी जीव को सचेत करते ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 33

by Nitya Oswal
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गुजरात के राजकोट जिले के वीरपुर गाँव के परम सिद्ध, त्यागी और साक्षात् अन्नपूर्णा के परम भक्त संत जलाराम ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 32

by Nitya Oswal
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भारत के महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के एक और परम सिद्ध, निश्छल और विट्ठल भगवान के अनन्य भक्त संत ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 31

by Nitya Oswal
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संत बुल्ले शाह जी की यह वाणी किसी भी प्रकार के बाहरी दिखावे और किताबी ज्ञान के घमंड को ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 30

by Nitya Oswal
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भारत के कश्मीर प्रांत की चौदहवीं शताब्दी की परम सिद्ध योगिनी और रहस्यवादी संत लल्लेश्वरी जी (जिन्हें कश्मीरी भाषा ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 29

by Nitya Oswal
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भारत के महाराष्ट्र के चौदहवीं शताब्दी के परम सिद्ध, विद्रोही और वारकरी संप्रदाय के महान संत चोखामेला जी की ...