Shree Kriti ની વાર્તાઓ

घुँघरू - 9

by Shree Kriti
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हाय ऑल ! इट्स मी अगेन विधि आहूजा ! शर्लिन ने मुझे घुँघरू और श्राप की सारी कहानी सुनाई ...

घुँघरू - 8

by Shree Kriti
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घुँघरू के प्रति अपने असीम अनुराग को मैंने भक्ति के रूप में बदल दिया था और अपनी देवी को ...

घुँघरू - 7

by Shree Kriti
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अनन्त देव की सहायता से मैंने उसके रहने की व्यवस्था जंगल के निकटतम गाँव वाराही में कर दी। घुँघरू ...

घुँघरू - 6

by Shree Kriti
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शर्लिन स्वप्निल की दी हुई डायरी रख कर भूल ग‌ई थी। उसे उस डायरी की याद तब आई जब ...

घुँघरू - 5

by Shree Kriti
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चॉंद सिंदूरी आसमां में इतराने लगा था, बड़ी मनभावन जगह थी। निर्जन पहाड़ियों से होकर एक नदी एक छोटी ...

घुँघरू - 4

by Shree Kriti
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कॉफ़ी कॉर्नर में एक नौजवान जोड़ा बैठा था। वह जोड़ा इतना हसीन था कि हर किसी की नज़र उन ...

घुँघरू - 3

by Shree Kriti
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वो रात एक आम रात जैसी ही थी, हम दोनों पार्टी से वापस लौट रहे ... मैं शर्लिन को ...

घुँघरू - 2

by Shree Kriti
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हैलो फ्रेंड्स ! मैं हूँ विधि आहूजा! ओह ! अच्छा तो आप ये सोच रहे हैं कि मैं आखिर ...

घुँघरू - 1

by Shree Kriti
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करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ...................शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे के आखिरी दिन एक विचित्र घटना ...

किघकन्या - 7

by Shree Kriti
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कुछ दिन पहले सहसा मृत्यु ने इस कहानी की सबसे निर्मल, सबसे भोली और सबसे सुकुमार पात्र ' रोहिणी ...