Kapil Tiwari ની વાર્તાઓ

लोकधर्म की कहानियाँ

by Kapil Tiwari

आज दोपहर मैं ऋषिकेश के एक लोकधार्मिक प्रतिष्ठित मंदिर में बैठा था। वहाँ बैठे-बैठे मुझे हर थोड़ी देर में ...

योगनगरी ऋषिकेश

by Kapil Tiwari
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'योगनगरी ऋषिकेश'—यह एक ऐसा नाम है, जिसे शायद ही किसी ने न सुना हो। इस नाम के चर्चा में ...

चांदनी

by Kapil Tiwari
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यह चांदनी है।सुबह का समय था। गंगा के किनारे, ऋषिकेश में मैं कुछ पढ़ रहा था। तभी सामने से ...

सफेद झूठ और सुनहरे सपने

by Kapil Tiwari
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हम सपरिवार खेत पर काम कर रहे थे। मन के भीतर एक दबी हुई खुशी थी कि मैंने 'नवीं' ...

व्रत और उपवास

by Kapil Tiwari
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“व्रत” और “उपवास” ये शब्द आपने कई बार सुने होगे क्या आप इनका वास्तविक अर्थ जानते है?व्रत का अर्थ ...

14235: जिज्ञासा और जाति

by Kapil Tiwari
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“सफ़र अक्सर हमें मंजिलों से नहीं, सवालों से मिलाते हैं। ट्रेन की ऊपरी बर्थ पर बैठा वह ग्यारह साल ...