Jyoti Prajapati ની વાર્તાઓ

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 12

by Jyoti Prajapati
  • 72

जब भूपेंद्र को पता चला कि वंशिका की तबीयत खराब है, तो वे परेशान तो हुए, लेकिन उससे कहीं ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 11

by Jyoti Prajapati
  • 345

अगली सुबह जब काया की नींद खुली, तो उसके मन में एक योजना थी कि वह बच्चों को जगाएगी, ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 10

by Jyoti Prajapati
  • (5/5)
  • 600

काया जब वापस लौटी, तो उसके कदम पहले की तरह डरे-सहमे नहीं थे। अपनी माँ को खोने का दुख ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 9

by Jyoti Prajapati
  • (5/5)
  • 1.2k

काया के जाने के बाद घर की सूरत बदल गई थी, लेकिन वैसा कोहराम नहीं मचा जैसा भूपेंद्र ने ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 8

by Jyoti Prajapati
  • (0/5)
  • 1.5k

सुबह की आपाधापी के बीच घर का माहौल ऊपरी तौर पर तो सामान्य दिख रहा था, लेकिन वंशिका के ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 7

by Jyoti Prajapati
  • 852

उस रात, डाइनिंग टेबल पर काया के हाथ के बने पुलाव की खुशबू ने भले ही माहौल में थोड़ी ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 6

by Jyoti Prajapati
  • 501

दोपहर का वक्त था। खिड़की से आती धूप अब फर्श पर लंबी लकीरें बना रही थी। घर में एक ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 5

by Jyoti Prajapati
  • 636

रात के दस बज चुके थे। बच्चों को सुलाने के बाद काया ने पूरे घर का चक्कर लगाया। ड्राइंग ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 4

by Jyoti Prajapati
  • (0/5)
  • 1k

शाम के पांच बज रहे थे। सूरज की सुनहरी किरणें अब नारंगी होकर खिड़कियों से विदा ले रही थीं। ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 3

by Jyoti Prajapati
  • (0/5)
  • 831

दोपहर के डेढ़ बज रहे थे। सड़क पर स्कूल बसों के हॉर्न की आवाज़ें गूँजने लगी थीं। काया ठीक ...