GANESH TEWARI 'NESH' (NASH) ની વાર્તાઓ

चेतना का स्रोत

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३३) की व्याख्या"विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि"भावार्थ --हे प्रभु ! सारी विद्याओं का आदि‌ मूल‌ तू ही‌‌ है।मंत्र —विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि--2.23.2पदच्छेद-विश्वेषाम् + ...

वह देवों का देव

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 234

ऋगुवेद सूक्ति-(34) की व्याख्या--"देवो देवनामसि"ऋग्वेद- 1-94-13अर्थ--हे प्रभु ! तू देवों का देव है।विस्तृत भावार्थ :इस मन्त्र में परमात्मा की ...

मुक्ति की कामना

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 261

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या"स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् ...

सर्वभूतहितेरत

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 501

ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या"मा नः प्रजा रीरिषः”ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्रभु ! तू हमारी सन्तानों को नष्ट न कर।शब्दार्थ--मा = मत ...

सत्य की खोज

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 375

ऋगुवेद सूक्ति--(३७) की व्याख्या"सत्या मनसो मे अस्तु"ऋगुवेद--१०/१२८/४भाव--मेरे‌‌ मन के भाव सच्चे हों।"सत्या मनसो मे अस्ति"पदच्छेद--सत्या । मनसः । मे ...

शत्रु हृदय में भय

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 537

ऋगुवेद सूक्ति-- (३८) की व्याख्या --"भियं दधाना हृदयेषु शत्रुव:"ऋगुवेद--१०/८४/७भाव--शत्रु के हृदय में भय उत्पन्न कर दो।भियं दधाना हृदयेषु शत्रूणाम्।शाब्दिक ...

साहस मत छोड़ो

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 485

ऋग्वेद सूक्ति-- (39) कीन धृष्णुं त्यजेत--९/९७/७ऋगुवेदभावार्थ --साहस मत छोड़ो।पूरा मूल मंत्र --यहाँ दिया गया संदर्भ ऋग्वेद 9.97.7 से जुड़ा ...

उसके समान कोई नहीं

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 564

ऋगुवेद सूक्ति-- (४०) की व्याख्यान त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता --ऋगुवेद--१/८४/१९भावार्थ --हे मघवन(ईश्वर) ! आपके सिवा दूसरा सुख देने वाला कोई ...

परम ज्योति

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 672

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्याऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है।मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह ...

श्रैष्ठ मार्ग

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 639

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्याऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है।मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह ...