Vandna Sharma ની વાર્તાઓ

गुरु गुड़ ही रहा चेला चीनी हो गया

by Vandna Sharma
  • 72

अक्टूबर का महीना था। सुबह-शाम की हवा में हल्की ठंडक घुलने लगी थी। सूरज अभी-अभी क्षितिज के पार से ...

शीनू की मंजिल

by Vandna Sharma
  • 564

कहानी - शीनू की मंज़िलशीनू इस वर्ष शहर की नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम आई थी। उसकी आँखों में बड़े ...

अति चिंतन

by Vandna Sharma
  • 870

मंजू आज सुबह से ही बहुत थकी हुई महसूस कर रही थी। वैसे तो उसे नींद बहुत कम आती ...

अपराजिता

by Vandna Sharma
  • 576

कहानी - अपराजितासंध्या का समय था। दिन ढल चुका था, अंधेरा अभी पूरी तरह बना नहीं था। अपराजिता, जिसे ...

भक्ति की शक्ति

by Vandna Sharma
  • (5/5)
  • 921

कहानी भक्ति की शक्तिलेखिका डॉ वंदना शर्माकिसी शहर में एक मध्यमवर्गीय परिवार रहता था। दुलार चंद और उनकी धर्मपत्नी ...

रघु की उड़ान

by Vandna Sharma
  • 1.1k

गांव के बड़े वाले मैदान में आज बड़ी चहल-पहल थी। चुनाव का मौसम था। एक क्षेत्रीय नेताजी मंच से ...

आभासी सखी

by Vandna Sharma
  • 1.4k

सुमन एक साधारण सी दिखने वाली, पर आधुनिक विचारों वाली लड़की थी। उसकी सबसे बड़ी खूबी और सबसे बड़ा ...

बुद्धिमानी ही अचूक अस्त्र है

by Vandna Sharma
  • 1.3k

बुद्धिमानी ही अचूक अस्त्र हैआशीष आज हमेशा की तरह समय पर ऑफिस पहुँचा था। लैपटॉप ऑन किया ही था ...

खंडहर बनी जिंदगी

by Vandna Sharma
  • 1.3k

सुनो! सुनो! कब से इंतजार में बैठा हूँ अपनी व्यथा सुनाने को। सब राही बिना रुके ही चले जाते ...

असली सुकून

by Vandna Sharma
  • (5/5)
  • 1.5k

कहानी अंधी दौड़ से सुकून तकलेखिका डॉ वंदना शर्मारीना अभी-अभी ऑफिस से आई थी। लैपटॉप मेज पर रखकर वह ...