Devendra Kumar ની વાર્તાઓ

ए.आई. बन गयी जादुई चिराग का जिन्न

by Devendra Kumar
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बचपन में जादुई चिराग के घिसने से निकलने वाले जिन्न या जिन्नात की बेमिसाल ताकत और करामात की कहानियाँ ...

जैसी करनी वैसी भरनी

by Devendra Kumar
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जैसी करनी वैसी भरनी सुन कर बड़ा दुःख हुआ था कि मेरा एक पुराना सहयोगी राकेश सोलंकी दिल्ली के ...

गुरु की नगरी और विमान अपहरण

by Devendra Kumar
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गुरु की नगरी, अमृतसर ने जितने अच्छे बुरे अनुभव उतराव चढाव देखे है, विश्व के बिरले ही नगरों ने ...

ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस देत

by Devendra Kumar
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ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस दे उपरोक्त देशी कहावत मैंने दो अवसरों पर सुनी थी, दोनों अलग ...

सिंगापुर में फांसी

by Devendra Kumar
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मेरी बेटी अपर्णा सिंगापुर में कोई बीस वर्ष से रह रही है अतः यहाँ हर वर्ष आना होता रहता ...

लालाजी जैनी साहेब

by Devendra Kumar
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लालाजी जैनी साहेब लाला जी जैनी साहेब हमारे शहर मुज़फ्फरनगर नगर के नई मंडी कहलाने वाले अमीर इलाके के ...

कर्नल का कोर्ट मार्शल

by Devendra Kumar
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कर्नलकाकोर्टमार्शल-देवेन्द्र कुमारकर्नलएम.पी.सिंह, पी.वी.एस.एम कोफौज से रिटायर हुए लगभग 10/12वर्ष होचुकेथे| रिटायरहोने के बाद उन्होंने दिल्लीमें द्वारकासेक्टर 7 की ‘आर्मीनेवी ...

बर्डस ऑफ पैसेज

by Devendra Kumar
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बर्ड्सऑफ़ पैसेजविदेशमंत्रालय की विदेशसेवामें राजनयिक बन कर जाना हमारे समय में सर्वोत्कृष्टसर्विस माना जाताथा| इसीलिये आईए.एस.की परीक्षा के फार्मभरतेसमयलगभग ...

विभागीय जाँच उर्फ़ मारे गए गुलफाम

by Devendra Kumar
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बातपुरानीहै पर काफी वर्ष के बाद भी शेखर सिंह को ऐसे याद आती है जैसे बस कल कीहीहो| शेखरसिंहरिटायर्डअधीक्षकअभियंता ...

कभी धूप कभी छांव

by Devendra Kumar
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कभी धूप कभी छांव जीवन में भी और यूनिफार्म सर्विस के दौरान भी तरह तरह के रंग मुझे देखने ...