Vrajesh Shashikant Dave ની વાર્તાઓ

अन्तर्निहित - 50

by Vrajesh Shashikant Dave
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[50]अपनी निर्दोषता सिद्ध होने पर वत्सर मन ही मन श्री कृष्ण का धन्यवाद करते हुए स्तुति करने लगा। न्यायालय ...

अन्तर्निहित - 49

by Vrajesh Shashikant Dave
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[49]“दो दिन पूर्व मेरे कार्यालय में सपन और निहारिका के साथ कपिल महोदय भी आए थे। उन्होंने मुझे उनकी ...

अन्तर्निहित - 48

by Vrajesh Shashikant Dave
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[48]“वत्सर ने सभी परीक्षणों की अनुमति दे दी है। अब सत्य प्रकट होकर रहेगा।” सपन ने कहा।“मुझे तो प्रतीत ...

अन्तर्निहित - 47

by Vrajesh Shashikant Dave
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[47]“श्रीकृष्ण के चरित्र के विषय में बात करना किसी के भी सामर्थ्य की बात नहीं। तथापि इतना समझ लो ...

अन्तर्निहित - 46

by Vrajesh Shashikant Dave
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[46]“मैं जानता हूँ। वेदों में राधा का नाम है। ऋग्वेद में है जो सबसे प्राचीन ग्रंथ है।” सहसा स्वामीजी ...

अन्तर्निहित - 45

by Vrajesh Shashikant Dave
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[45]“कपिल महोदय, और कोई तर्क है क्या?” या इस बात को यहाँ सम्पन्न मानकर स्वीकार कर लें कि राधाजी ...

अन्तर्निहित - 44

by Vrajesh Shashikant Dave
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[44]न्यायालय का समय होते ही न्यायाधीश ने प्रवेश किया। उपस्थित जन समुदाय पर विहंगम दृष्टिपात किया। भागवत कथाकार चेतन ...

अन्तर्निहित - 43

by Vrajesh Shashikant Dave
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[43]“भागवत ग्रंथ में श्रीकृष्ण का पूरा जीवन चरित्र है। जन्म से लेकर देह त्याग पर्यंत श्रीकृष्ण का चरित्र महर्षि ...

अन्तर्निहित - 42

by Vrajesh Shashikant Dave
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[42]“कपिल महोदय, क्या प्रमाण लेकर आज ऊपस्थित हुए हो?” न्यायाधीश ने पूछा।“महाशय, कभी कभी व्यक्ति का चरित्र ही स्वयं ...

अन्तर्निहित - 41

by Vrajesh Shashikant Dave
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[41]राहुल, नदीम, सोनिया, कपिल, सपन, निहारिका। सभी एक कक्ष में बैठकर न्यायालय द्वारा दिए गए तीन दिनों के समय ...