CHIRANJIT TEWARY ની વાર્તાઓ

श्रापित एक प्रेम कहानी - 40

by CHIRANJIT TEWARY
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दयाल मन ही मन सौचता है---" क्यो ना इसको मालिक के लिए उठा लू ।उस लड़की को दैखकर दयाल ...

तेरे मेरे दरमियान - 60

by CHIRANJIT TEWARY
  • 678

आदित्य :- कृतिका , छोड़ो , चुप हो जाओ ।कृतिका :- क्या चुप हो जाओ । ये अपने आपको ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 39

by CHIRANJIT TEWARY
  • 473

लोगो की रोने की आने आने लगी है। दक्षराज कहता है---दक्षराज :- चलो दयाल बाहर जा कर देखते हैं। ...

तेरे मेरे दरमियान - 59

by CHIRANJIT TEWARY
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  • 1.1k

उन बदमाशो मे से एक जानवी के करीब आने लगता है , जानवी चिल्लाती है --जानवी :- नही , ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 38

by CHIRANJIT TEWARY
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वर्शाली एकांश से कहती है----वर्शाली : - एकांश जी आप मुझे अपने घर तक पहूँचा देंगे ?सत्यजीत कहता है--सत्यजीत ...

तेरे मेरे दरमियान - 58

by CHIRANJIT TEWARY
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आदित्य जान बूझकर जानवी को जलाने के लिए कहता है --आदित्य :- कंश मामा ..!तिरु :- येस भांजे ।आदित्य ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 37

by CHIRANJIT TEWARY
  • 672

गुना एकांश और आलोक के लिए प्लेट लगा देता है और कहता है---यार ये लड़की कोई अप्सरा है क्या ...

तेरे मेरे दरमियान - 57

by CHIRANJIT TEWARY
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कृतिका :- कैसे चितां ना करु । अंकल ( अशोक ) आप उसे कल अपने घर लेकर आईएगा । ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 36

by CHIRANJIT TEWARY
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कुंम्भन का नाम सुनकर सब घबरा जाता है। और डर से इधर उधर देखने लगता है।एकांश घबराते हुए कहता ...

तेरे मेरे दरमियान - 56

by CHIRANJIT TEWARY
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आदित्य :- अहां । मैं नही रोकुगां ।मोनिका :- तो फिर कौन रोकेगा ।आदित्य फिर हल्की मुस्कान देता है ...