R B Chavda ની વાર્તાઓ

दिल ने जिसे चाहा - 39

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 1.1k

मॉल के अंदर कदम रखते ही चारों तरफ़ रोशनी, लोगों की चहल-पहल और हल्का-सा संगीत पूरे माहौल को खुशनुमा ...

दिल ने जिसे चाहा - 38

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 1.3k

ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत खरीदारी कपड़ों या गहनों की नहीं होती...वह होती है उन सपनों की, जिन्हें दो लोग ...

दिल ने जिसे चाहा - 37

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 1.3k

मयूर सर ने घड़ी को अपने हाथों में बहुत संभालकर उठाया।उनकी उंगलियाँ उस घड़ी पर ऐसे फिर रही थीं, ...

दिल ने जिसे चाहा - 36

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 1.2k

सगाई की तारीख तय हो चुकी थी।यह सिर्फ़ एक तारीख नहीं थी... यह उन दो दिलों के वर्षों पुराने ...

दिल ने जिसे चाहा - 35

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 1.9k

सुबह आज सच में अलग थी।घर वही था, दीवारें वही थीं, लेकिन माहौल में एक अजीब-सी हलचल थी—जैसे हर ...

दिल ने जिसे चाहा - 34

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 2k

बहुत देर रात तक रुशाली की आँखों में नींद नहीं आई।कमरे की लाइट बंद थी, खिड़की से हल्की-सी चाँदनी ...

दिल ने जिसे चाहा - 33

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 2.7k

सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में उतर रही थी। कमरे में सन्नाटा था, लेकिन मयूर सर के ...

दिल ने जिसे चाहा - 32

by R. B. Chavda
  • (4.9/5)
  • 8k

अगली सुबह…सुबह की हल्की धूप खिड़की से होकर कमरे में उतर रही थी।मयूर सरदेर तक जागते रहे थे रात ...

दिल ने जिसे चाहा - 31

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 4k

शादी को दो दिन बीत चुके थे…लेकिन मयूर सर के मन में जैसे कोई बात ठहरी हुई थी…एक ऐसी ...

दिल ने जिसे चाहा - 30

by R. B. Chavda
  • (4.9/5)
  • 4.4k

शादी का venue रोशनी से जगमगा रहा था।चारों तरफ झालरों की चमक, फूलों की खुशबू, और शहनाई की धीमी-सी ...