मेलाबदलते भारत की सामाजिक और भावनात्मक अर्थव्यवस्थभारतवर्ष में प्रत्येक पर्व-त्योहार के अवसर पर एक विशेष व्यवस्था हुआ करती थी, ...
— हाँ, घर से दूर एक बड़े महानगर में हूँ।हाँ, बड़े महानगर में!— देखे भी हो कभी, या सिर्फ ...
बचपन की स्मृतियाँ अक्सर जीवन के किसी मोड़ पर अचानक लौट आती हैं और फिर मन को उन गलियों ...
“त्यागात् शान्तिरनन्तरम्” — यह दिव्य सूत्र हमें बताता है कि त्याग के पश्चात् ही शान्ति का उदय होता है। ...
दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय से मेरा जुड़ाव केवल एक विद्यार्थी, नागरिक या दर्शक का संबंध नहीं है, बल्कि उस ...
वटवृक्ष में आग लगने की घटना निस्संदेह अत्यंत दुःखद, चिंताजनक और आत्ममंथन का विषय है। किसी भी धार्मिक आस्था, ...
मनुष्य के जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनका महत्व शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा ...
पितृपक्ष महासंगम :—आश्विन मास का आगमन होते ही गया जी की पहचान मानो बदल जाती है। यह परिवर्तन केवल ...
राम राज : आदर्श शासन, आदर्श समाज और मानवीय मूल्यों का शाश्वत दर्शन“राम राज” भारतीय संस्कृति और चिंतन की ...
एक गाँव था—छोटा, शांत और अपनी सहजता में अद्भुत।सुबह की पहली किरण जब कच्ची गलियों को छूती, तो लगता ...