Bharti 007 ની વાર્તાઓ

मैं तेरे प्यार में पागल - 3

by Bharti 007
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दोपहर ढल चुकी थी... आसमान में बादल घिर आए थे , त्रिशा और तुलसी रॉयल्स एनफील्ड थंडरबर्ड पर बैठे ...

एक अनकही प्यार की शुरुआत

by Bharti 007
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जबलपुर की शांत गलियों में पली-बढ़ी आराध्या त्रिपाठी के सपनों में एक ही तस्वीर थी—सफेद एप्रन, स्टेथोस्कोप और एक ...

मैं तेरे प्यार में पागल - 2

by Bharti 007
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नंदीश संधु सिंह उस रात बंगले से निकल पड़ा आज वह सिर्फ़ एक पति नहीं था , वो वकील ...

मैं तेरे प्यार में पागल - 1

by Bharti 007
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विशाल, अथाह समुद्र के बीचों-बीच एक आलीशान-सी क्रूज़ लहरों से जूझ रही थी। चारों ओर सिर्फ़ काला पानी, तेज़ ...

संगिनी

by Bharti 007
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“संगिनी”आस्था के कमरे में आज अजीब-सी हलचल थी। दीवार पर टंगी घड़ी की टिक-टिक उसे बार-बार याद दिला रही ...