भावों की ये, अभिव्यक्ति शब्दों के आधार है मेरी कलम ही, मेरे अस्तित्व की पहचान है.

जिंदगी की गणित को सरल कीजिए।
कुछ दुखों का भाग और खुशियों का गुण कीजिए।

-Uma Vaishnav

🙏 🙏

वृक्ष (दोहे)
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प्राण वायु वृक्ष से मिले ,जो जीवन आधार।
इनकी सुरक्षा का हमें, उठाना होगा भार।।

वृक्ष देता शुद्ध हवा, सुरक्षित जिससे प्राण।
पेड़ लगाओ तुम सदा, होगा जग कल्याण।।

वृक्ष ही जीव जगत के, जीवन का आधार।
इनकी सुरक्षा करे हम, मन में ले हम धार।।

प्राण दाता पेड़ बने , प्रकृति बनी प्रमाण।
इससे चलता है सभी, जीव जगत का प्राण।।

उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित

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🙏 सुप्रभात जी 🙏

कोयल काली गा रही, बीत गई है रात।
सूर्य की कारणें लाइ हैं, देख नूतन प्रभात।।

मंदिर के पट खुल गये, हो गई है प्रभात।
शंख की गूंज बज उठी, पक्षी कर रहे बात।।

उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित

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जैसे सेहत के लिए पोष्टिक भोजन जरूरी हैं।
वैसे ही अच्छे दिमाग के लिए,
अच्छी किताबों का अध्ययन जरूरी हैं।

-Uma Vaishnav

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बहते पानी से एक बात सीखी है।
समय या स्थिति कितनी भी विकट क्यूँ ना हो,
हम अपना रास्ता बना ही लेते हैं।

-Uma Vaishnav

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मुक्तक
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गलती होने पर डांटती है,
वो गुस्सा भी बड़ा दिखती है,
माता की डांट है ममता मय,
माता ही हमें सवारती है।


Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित

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रिश्तों की परख कठिन समय में ही होती है।

-Uma Vaishnav