Muhabbat krni h to kitabo se kro... bewfai bhi hui to kabil bna k chhodegi...#D

खैरियत से हूं मैं अपने शहर में,,,
तुम अपने शहर में अपना ख्याल रखना...#D

मांगना होगा कुछ तुमसे तो बस यही मांगूंगा,,,
तुम मुस्कुराते रहा करो, मैं भी खुश रहूंगा...#D

खाली पन्नों की तरह दिन पलटते जा रहे है,,,
ख़बर नहीं है कि ये आ रहे है या जा रहे है...#D

....#D

वो जो कहते है, शायद उनके मायने में गलत न होगा,,,
वहीं अगर हम कह दें, तो बखूबी उन्हें बर्दास्त न होगा...#D

तेरी ये मसरूफियत, तेरी ये मजबूरी, मेरे सर-आंखों पर,,,
बस तेरा इस तरह बेपरवाह होना, मुझे अच्छा नहीं लगता...#D

दर्द को मुस्कुराकर सहना क्या सीख लिया,,,
सबने सोच लिया मुझे तकलीफ नहीं होती😊😊...#D

खुशियों के माहौल में,,,
घर का फरमान आ रहा है,,,
जो कहते थे गांव में क्या रखा है,,,
आज उन्हें भी गांव याद आ रहा है...#D

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सारे मसरूफ है यहां दूसरों की कहानियां जानने में,,,
इतनी सिद्धत से यदि खुद को पढ़ते तो खुदा हो जाते...#D

समझदार बनिए, समझदारी दिखाइए, सुरक्षित रहिए...#D