zinadgi khak na thi... khak udaate gujri....

लिख तो देंगे दर्द का हिसाब बेहिसाब..
पर महसूस कर सकें वो एहसास कहां..

कुछ भावनाएं जो लफ्जों में बयां नहीं हो सकती.
उन्हें कागजों में बिखेरने की कोशिश करती हूं.
वो उदासी जो मेरी हंसी से छलक जाती है..
उन्हें इन अल्फाजों में समेटने की कोशिश करती हूं..

વધુ વાંચો

भोलेनाथ शंकरा
आदि देव शंकरा
तेरे जाप के बिना
चले ये सांसे किस तरह
तेरे नाम की ज्योत ने हर लिया तमस मेरा..
जै शिवाय शंकरा.. भोलेनाथ शंकरा...

વધુ વાંચો

आदत-ए-शख़्सियत ऐसी हो गयी है..
जीने के लिए दर्द, अब जरूरी सा लगता है...

थकी हुई होने पर उसे थकी हूं कहने का अधिकार नही है
बीमार होने पर उसे आराम करने का अधिकार नही है
मन होने पर उसे देर से उठने का अधिकार नहीं है
अपनी मर्ज़ी से बाहर अकेले घूमने का अधिकार नही है
अपने घर की मैं अपनी ना हो सकी
और पराए घर ने अपना ना सका
हां मै अपराधी हूं,
हां मैं लड़की हूं..

વધુ વાંચો