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धूप का टुकड़ा उठा लाया था मैं घर पे
छांव अभी निकाली थी मैंने जेब से

તન્હાઈને તરન્નુમમાં ગાઉં છું
હું એકલો જ રૂમમાં ગાઉં છું

दीवाने है हम.. दीवाने रहेंगे
जलते इस जहां में परवाने रहेंगे

देखा ना-उम्मीदी से तो मुश्किल ही नज़र आया
देखा दिल की नज़र से तो दिल ही नज़र आया

दुश्मन है जो मेरा
यारों की महफ़िल में है

પ્રેમની પાઠશાળા સર્વથી ઊંચી હોય છે

हमारी राहें वहीं मुड़ी थी जहां से तुम थे मुड़ने वाले
हमारी बाहें वहीं बढ़ी थी जहां से तुम थे जुड़ने वाले

हम है राही.. चलते रहे.. क़दमों को लिए..

बड़े ही दूर तो है चांद और सितारे
तुम्हे देखकर ही दिन बन गए हमारे

रहेगा लबों पर तराना उसी का
मुहब्बत में जो हो गया हो सभी का