Hey, I am on Matrubharti!

ठंड की चादर ओढ़े रात आयी है
ठिठुरती हुई मुस्कान आयी है
चाँद से सोचा ,चलो बात करें
पूछ लिया हमने कैसे हो
चाँद ने भी यही कह दिया
ठंड की चादर ओढ़े रात आयी है
ठिठुरती हुई मुस्कान आयी है
दोनों ठहाके लगाकर हंसने लगे
हम चाँद से बतियाने लगे।।

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एक सफर है मेरा मैं राही उसका
चला जा रहा हूँ मंज़िल की तलाश में
मिल जाये कभी तो क्या बात होगी
जनाब वाह वाह होगी ।।

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जिसे कभी पाया ही नही
उसको खोने का कैसा गम।।

घर ,मम्मी पापा से होता है
घर,पति ,बच्चे से होता है।।
जिस घर मे ye नहीं
ओ घर,घर नही श्मशान होता है।।

जहा प्यार है,वहाँ भरोसा है।
जहाँ भरोसा है वही है उम्मीद।
और जहाँ उम्मीद होता हैं।
वही है प्यार

जहा पे भरोसा, उम्मीद, प्यार सब है।
उसी का सुखी है घरद्वार।।

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छोड़ दी मैंने उसका इंतजार करना।
जिसको मेरे प्यार की कदर नहीं
उस से कोई भी उम्मीद करना, मतलब खुद को बर्बाद करना।।

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मेरे किस्मत में है ठोकरें हजार।
मुझ जैसी बदकिस्मत से तुम न कर प्यार की बात।।