mushafir

प्यारे किताबों की कहानी नही अहसासों की रवानगी हो तुम..... बातों का किस्सा नहीं
मेरे जीवन का हिस्सा हो तुम..... ?सिर्फ तुम कान्हा?

@Prabhas bhola

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हे कान्हा जरूर नहीं तुम मेरी सारी ख्वाईशो को मानो दहलीज पर रख दी है अजीं आगे तुम जानो,,
सिर्फ तुम कान्हा

ભર શિયાળે વરસાદ થયો છે,
લાગે છે મોસમ સાથે પણ દગો થયો છે,,,

ऐ वक़्त शुक्र गुज़ार हूँ मै तेरा अगर तू न बदलता तोह बदलते हुए लोग मुझे नही देखते

फैसला जो कुश हो मंजूर होना सहिये,
जंग हो या इश्क़ भरपूर होना चाहिए,,,

लड़ाई है अब खुद से,
खुद को बदल ने की,,