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उड़ना चाहा जो उसने खुले आसमान में,
कहा गया कि उस पर अधिकार केवल हमारा है,
तुम्हारे हिस्से आती केवल ज़मीन है,
वो भी घर की चौघट तक सीमित।

-Pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_

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ज़िंदगी भी होती काश लिखाई पेंसिल की,
कुछ गलत लिख लेते गर उसे मिटा कर नए सिरे से लिखाई हो पाती ।

-Pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_

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किसी की सौंपी हुई जिम्मेदारी निभाना खुद की जिम्मेदारी निभाने से भी ज्यादा ज़रूरी हो जाता है,
क्योंकि उसमें जिम्मेदारी सोंपनेवाले का भरोसा भी जुड़ जाता है।

-Pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_

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कभी कभी कुछ बातें मज़ाक समज़कर हँसकर यूँही कह देते है लोग,
किस कदर चुभती है उनकी बातें इसका अंदाज़ा भी नही लगा सकते वो लोग।

-Pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_

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जिंदा इंसानों की अच्छाईयाँ सराहने से कतराते हो,
और उनके मरने पे अफसोस जताते अच्छा आदमी था ये कहने जरूर आते हो।

-Pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_

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लगी पुरानी एक तसवीर दिवार पर
गिर कर तुट गई अचानक से,
न थी आदत आँखो को के देखे
दिवार को बिना उस तसवीर के,
लगा वक़्त बहुत उन आँखो को
भरने में स्थान उस तसवीर का,
तसवीर थी बेजान फिर भी इतना लगाव
सोचो! क्या बितती होगी जिंदा इंसानों के जाने पर ?

-Pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_

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वक़्त को कहाँ कोई बाँध पाया है बहती नदी के जैसे,
उसके तो साथ चला जा सकता है पानी के बहाव के जैसे।

-Pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_

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ज़रूरी नहीं की लिखनेवाले पे हर वो दर्द गुज़र चुका है जो उसने बयां किया है,
किसी के दर्द को नज़दीक से महसूस कर के भी बयां किया जा सकता है।

-Pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_

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कुछ बातों को समजने के लिए आवाज़ ज़रूरी नहीं होती,
क्योंकी ऐसी बातें अक्सर खामोशिया बयां कर जाती है।

-pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_

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पढ़ाई बहुत कर ली मैंने
औपचारिकता निभाना समज़ न आया,
जिस बात से न हो दिल राज़ी,
उसको ज़मीर ने ठुकराया बस यही ज़माने को न भाया।

-pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_

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