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नफरतों की सियासत हमको अब मंज़ूर नहीं।
अपनों की लाशों पर हंसते मंज़र हमको अब मंज़ूर नहीं।।
बहुत हो चुकी ना पाक सियासत, ऐसी
सियासत हमको अब मंज़ूर नहीं।।
~©निमिषा~

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ज़िन्दगी कुछ इस तरह उलझती रही।
बस हर एक पल बिखरती रही।।
कोई जाकर कह दे उस खुदा से।
मैं बिखर कर भी संवरती रही।।
~©निमिषा~

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खुली आंखों से हमने ख्वाब देखे।
दो चार नहीं बेशुमार देखे।।
मगर हमको ये मालूम न था।
पत्थर की इस दुनिया में
टूटेंगे ये ख़्वाब मेरे।।
शीशे से ये बिखरेंगे।
चुभ जाएंगे तन मन में मेरे।।
~© निमिषा~

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अक्स अधूरा है मेरा।
हर भाव अधूरा है मेरा।।
दर्पण जब भी देखूं तो।
हर रोम अधूरा है मेरा।।
कान्हा तुम बिन देखो।
ये प्राण अधूरा है मेरा।।
~©निमिषा~

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क्यों अक्सर ऐसा होता है।
जो दिल की धड़कन होता है।।
जो मन की उलझन होता है।
बस वही एक चेहरा है।।
वो अपना नहीं होता है।
क्यों अक्सर ऐसा होता है।।
~© निमिषा~

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दिल को संवारती है।
शीशे में ढालती है।।
सच्ची जो ही महोब्बत।
दुनिया से हारती है।।
~© निमिषा~

अपनी नज़र से देखो एक बार।
नज़रों को नज़राना मिल जाएगा ।।
दिल के सूने आंगन में फिर से।
खुशियों का पैमाना भर जायेगा।।
~✍️निमिषा~

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जीवन जीना है तो इस दुनिया में।
बहुत कुछ सहना पड़ता है।।
अरमानों की मौत कभी तो।
अपनों से ही दूरी ज्यादा।।
सांसों के चलने का भुगतान ।
सभी को करना पड़ता है।।
जीवन जीना है तो इस दुनिया में।
बहुत कुछ सहना पड़ता है।।
~©निमिषा~

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Shiva! the Mahadev.
Rythem of life Shiva.
End of life Shiva.
Light of universe Shiva.
perfect Yogi Shiva.
Shiva! Shiva! Shiva!
Every soul Shiva.
~✍️ nimisha~

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।