માતૃભારતીના વાચકો માટે મિતલ ઠક્કરનું નામ હવે અજાણ્યું નથી. તેમની રસોઇ ટીપ્સ અને બ્યુટી ટીપ્સ બુક્સને ખૂબ પસંદ કરવામાં આવી હતી. અને વિવિધ વાનગીઓની અલગ-અલગ બુકને પણ સારો પ્રતિસાદ મળ્યો છે. વાનગીઓની રીત સાથે તેના વિશે આરોગ્યલક્ષી માહિતી પણ ઉપયોગી બની રહે છે. તેમની રસોઇમાં જાણવા જેવું દરેક મહિલા માટે ઉપયોગી છે. તેમની દિયર-ભાભીના સંબંધ પર આધારિત નવલકથા મોનિકા પણ પ્રગટ થયેલી છે. તેની વિશેષતા એ છે કે તેમાં રહસ્ય અને રોમાંચ છે.

कुछ लम्हों की ज़िन्दगी है, ज़ी लो इसे खुशनसीबों के जैसा,
महकते रहो सदा फूलों के जैसा, अगर बिखरो तो बिखरो खुशबू के जैसा।

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“वो बचपन ही अच्छा था खेलते खेलते चाहे 
छत पर सोए या ज़मीन पर, आँखे हमेशा बिस्तर पर ही खुलती थी।”

चॉंदनी बिखर गयी है सारी…
रब से है ये दुआ हमारी…
जितनी प्‍यारी है तारों की रोशनी आपकी नींद भी हो इतनी ही प्‍यारी.. !!

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प्यार और विश्वास.. कभी भी मत खोना क्योकि प्यार हर किसी  से नहीं होता और विश्वास हर किसी पे नहीं होता!!

हर फूल आपको अरमान दे हर सुबह आपको सलाम दे एक ही मांग है भगवान से की वो आपके जीवन में खुशियों का वरदान दे!! 

सूर्य बोलते नही उनका प्रकाश परिचय देता हैं ठीक उसी प्रकार आप अपने बारे में कुछ न बोले, अच्छे कर्म करते रहे वही आपका परिचय देंगे. 
‼ आपका दिन शुभ हो ‼

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अक्सर वही रिश्ते, लाजवाब होते हैं..जो एहसानों से नहीं, एहसासों से बने होते हैं. जिंदगी में ऐसे लोग भी मिलते हैं…. जो वादे तो नहीं करते लेकिन निभा बहुत कुछ जाते है.
सुप्रभात

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वो भी क्या शाम थी जब पंछी घोसलों में आते थे,
अब तो हर रोज सिर्फ सीरियल घर मे आते है।

किसी का सरल स्वभाव उसकी कमजोरी नहीं होता है उसके संस्कार होते है।

दोनों तरफ से रिश्ते निभाए जाएं वही रिश्ता कामयाब होता है।
एक तरफ से सेंक कर तो रोटी भी नहीं बनाई जाती।
सुप्रभात!

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