I am not writer or auther, but I can read story in single line filled with emotions.

માન્યતા કઈ એમ છે કે,
દૂધ ઢોળાઇ તો અશુભ અને કાચ તૂટે તો શુભ...

મારે કાચ નાં ગ્લાસ માં દૂધ હતું અને ગ્લાસ પડ્યો તો દૂધ પણ ઢોળાયું અને ગ્લાસ પણ તુટી ગયો..

તો શું મારું ખાતું સરભર એમ???? 🤔🤔🤔

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सिसकियां गूंज रही थी उस कमरे की दीवार पर!
एक बेटी विदा हो रही थी, फूलों से सजी अर्थी पर!
दुनिया कह रही है मामला ज़रा नाज़ुक सा है,
खरोच नहीं है बदन पर, मामला जख्मी दिल का है!
जिस मा को अगली रात कम्बल ओढ़ाए सो गई,
अगली सुबह वोह ही सीढ़ी से गिरकर मौत की नींद सो गई!
मा की हालत कोई समझ नहीं पाया होगा,
इतना मासूम बच्चा कैसे उसे छोड़ कर जा पाया होगा!
बड़े भाई की तो आवाज़ सी नहीं निकल रही,
बूढ़ी दादी तो बच्ची को देखकर ही सेहम् गई!
तुझे अपनी हाथो से हल्दी लगाकर विदा करूंगा,
वोह मामा भी आंसू में हल्दी भिगोए चीख रहा!
मा मांग रही खुदा से, छीन ले मेरा सबकुछ दे मुझे बेटी मेरी!
ताउम्र तेरी इबादत की है, यह सौदा इतना भी मुश्किल नहीं!
बाप टूट रहा अपनी नन्ही कलि को मुरझाता यू देख कर,
तेरी बिदाई डोली में करनी थी, अर्थी तो मैने सोची ही नहीं??
कंधे तो फिर भी चार थे, बस बेकाबू से हालात थे!
आंसू तो फिर भी सब की आंखो में इतने ही थे, खुशी का घोल क्यू नहीं??
ऐसी कैसी यह बेटी की बिदाई हो रही????
उम्र से पहले छोड़ कर ऐसे कैसे चली गई,
नहीं नहीं! कहीं ये खुद का खून तो नहीं कर गई??
वक़्त के उस केहर पर भी लोग चार थे,
जिनके इस दुख पर बात करने के भी अलग अंदाज थे!
बाली उम्र में ही हल्दी में सजकर कर वोह चली गई!
हस्ता खेलता वोह मायका अपना सुना सा कर गई!
सवाल तो उसे भी करने होंगे हर वोह सख्स से?
मौत पर मेरी, मेरे दामन पर सवाल तुमने क्यू कसे??
मुझे भी विदा होना था डोली में, चार कंधे भी चाहिए थे लेकिन खुशी के!
मा! तेरा लड़कपन बोहत् याद आएगा,
जानती हूं मेरा भोलापन तुझे बोह्त रुलाएगा!
मा बाबा की आंखे बस एक यह ही सवाल कर रही,
तुझे जाने से पहले अलविदा तक कहने की फुरसत नहीं??





( कुछ अपनों को श्रद्धांजलि देने का कोई सही तरीका ही नहीं होता!
शायद इसीलिए क्युकी उनके छोड़ जाने का सही वक़्त नहीं होता।।।)

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More than 606k+ deaths happened due to corona virus and more than 10 billion infected and most up country has declared lockdown due to COVID 19.


Meanwhile indian parents to their married son/daughter:
"Lockdown ka fayda uthao..jaldi se khush khabar sunaooo."


आपदा को अवसर बनाओ। 😅😅

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और फिर मिले दोनो, ज़िन्दगी के ना चाहे मोड़ पर,
दोनो बंध गए थे अनचाही दोर से,
बनना चाहते थे एक दूजे के हमसफ़र, पर दोनो के हमसफ़र ही अलग बन गए!
भूली ना थी वोह भी, याद तो उसे भे बेहद आती थी!
बिछड़े तो जिस्म से थे, दोस्ती ने रिश्ता बरकरार रखा था!
देख एक दूजे को बस आंखे बोल रही थी,
दिल की धड़कन भी जैसे ज़िंदा सी हो गई थी!
चूम लिया उसने अपने सपनो की रानी को!
बस यह ही अंजाम देना चाहता हो जैसे अपनी अधूरी कहानी को!
सेहम गई वोह, आंख भर आयी आंसुओ से!
खुशी थी पर दर्द भी ज्यादा था उन आंखो में!
"तुम मुझे ऐसे छु नहीं सकते!" इतना ही बोल पाई वोह,
धड़कन जिसके नाम है, उसको ऐसे क्यू कह पाई वोह!
मुंह फेरकर चली गई वोह, बिना पढ़े उसकी आंखे!
शायद सुन लेती तो अब उतनी नम ना होती वोह आंखे!
आंखे उसकी एक ही बात कहती रही,
"मुझे जिस्म से बावस्ता नहीं है, यह बात अलग है तुझे नजरभर देखकर रोक ना पाया खुद को?
प्यार आज भी उतना ही है तेरी सख्शियत से, बस मांगे है कुछ आराम के पल तुझसे!
तू मेरे हर दर्द का इलाज है, तेरा बस होना ही मेरे लिए बोहत खास है!
तेरी गोद में सर रखकर जी भर के रोना चाहता हूं, बस इसी तरह एक दफा तेरा होना चाहता हूं!"

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वक़्त के दामन में यू उलझी है ज़िन्दगी!
हमेशा के लिए थम सकती है,
पर कुछ वक़्त के लिए रुक नहीं सकती!

ऐसे आलम में तुम जो यू हाथ थाम लेते हो,
डर है कि कहीं यह धड़कन रुक ना जाए!!


આમાં કવિ કહે છે, " આઘો મર....કોરોના નાં કેસ બહુ વધે છે..."

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वोह अल्हड़ सी बेफाम लड़की, खामोश बोहत है!
टूट गई है अंदर से या, दिल में दर्द का शोर बोहत है!

छोटी छोटी बातों में अब खुशी के बहाने ढूंढ़ती बोहत है!
टूट गया है एक ख्वाब या टूटे ख्वाबों की तड़प बोहत है!

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Only frustrated "CA article" can better get this:

Love unconditional hona chahiye..


Conditional to formatting bhi hai...

😅