I am reading on Matrubharti!

इतना भी दर्द ना दे ऐ ज़िन्दगी,

इश्क़ ही किया था, कोई कतल नहीं l

तेरे वादों पे कहा तक मेरा दिल फरेब खाए,

कोई ऐसा कर बहाना, मेरी आस टूट जाए ।

वजह से तो डूबता हैं हर कोई,

बेवजह डूबो तो कुछ बात बने l

गीली लकड़ी सा इश्क़ तुमने सुलगाया है।

न पूरा जल पाया कभी ,न बुझ पाया है l

Happy Mahashivratri to all Matrubharti family.
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

હૃદય થોડું ધ્રુજ્યું,
"ધબકાર" નિયમિત ના હતાં,

વૈદ્યે કહ્યું કાંઈ નથી,
"ખાલીપા" ની ખાલી હતી.

'રેત' માં હોત તો,
ભુસીયે નાખત...


તમે તો 'જીંદગી' માં પગલા પાડી બેઠા .

एक अरसा हुआ अल्फ़ाज़ो को स्याही मे भीगा देखे.

कम्बख़त मोबाइल ने चिट्ठियो का वज़ूद ही ख़त्म कर दिया |

जो हरगिज ना छोड़ी जाये,

मेरी वो आदत हो तुम l