हमारे उपर जो दुःख आते हे,वे हमारे ही पसंद किये होते हे,वे हमारे कर्मों के फल हे,वे हमारे स्वभाव के अंग हे।

मिसाल के तौर पर हमें ही लेलो,
जब प्रेमी दुर हो तो दिल से महसूस कर लो,
#मिसाल

-Deeps Gadhvi

स्वयम् से ज्ञानी और कोई नहीं,
यदि वह ज्ञान संसार में कल्याण हेतु के लिए हो।

-Deeps Gadhvi

भीष्म पितामह अजर अमर थे,
उनकी मृत्यु स्वयम् के योग से हुई,

जैसे उनको बाण लगते थे वह बाण तुटकर गीर जाते थे और पितामह के घाव भी भर जाते थे,
उनकी मृत्यु मस्तक(ब्रह्म रंध्र)छोड़कर आकाश की ओर चलें गएँ और इसी योग के कारण भीष्म पितामह ने अपने प्राण छोड़े।

-भागवत् गीता

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मुझे गर्व की अनुमति होती है जब स्वयम् को "एक" का हेतु समझ आया,
यह "एक" कोई सामान्य "एक" नहीं है यह है,,,,,

एक यानी "भीष्म"
एक यानी "कर्ण"
एक यानी "युद्ध विजयी"
एक यानी क्रुपाचार्य और अश्वत्थामा
और
एक यानी विकीर्ण सोमदत जी के पुत्र....

इन सभी तेजस्वी महापुरुष की कहानी सुनोगे तो "एक" का तात्पर्य समझ आएँगा...

-भागवत् गीता

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पितामह भीष्म जब तीरो से घायल और उसके ऊपर स्वयम् का शरीर था तब पितामह ने श्री कृष्ण को अपने निकट बुलाया और उनहोंने चार प्रश्न पुछे,

है गोविंद...

1)जल से पतला क्यां है..?
श्रीकृष्ण थोड़ा सा स्मीत करते हुए बोले की पितामह जल से पतला "ज्ञान" है,

2)भूमि से भारी कौन है..?
श्रीकृष्ण बोले की भूमि से भारी "पाप" है,

3)अग्नि से तेज़ कौन है..?
श्रीकृष्ण बोले कि अग्नि से तेज़ "क्रोध" है,

4)काजल से काला क्यां है..?
श्रीकृष्ण बोले कि काजल से काला "कलंक" है।

है गोविंद मैं भीष्म तुम्हें जान चुका हूँ कि तुम केवल शारथी हीँ नहीं स्वयम् नारायण हो,
यदि इतना ज्ञान मेरे पुत्रो में होताँ तो वेह आज कुरुक्षेत्र में ना आमने-सामने युद्ध ना कर रहें होते।

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हे पुत्र आज में इतनें सारे तीरो से जख्मी हुँ फ़िर भी मुझे मृत्यु नहीं आती उसका केवल एक ही कारण है कि मेरा परिवार आपस में युद्ध के कुरुक्षेत्र में है।

-श्री गंगा पुत्र पितामह भीष्म

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शरीर के मोह ने प्रेम और स्नेह को लज्जित कर दिया,
अन्यथा,
प्रेम और स्नेह तो आज भी राधै श्याम जेसी स्नेही जोडियो को ढुढता है।

📿श्री राधै📿

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भगवान करे सकुशल रहे दोनों,
आप और आपकी हँसी...

-Deeps Gadhvi

समय का क्या है,
बदलता रहता है,
पर मै हर समय तुम्हारा हुँ बस
इतना भरोसा मिल जाएँ तो मन से भार हल्का हो जाएँ।
#भार

-Deeps Gadhvi

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silence doesn't always means 'yes'
sometimes it's means i am tired of explaining to people who don't even care to understand.

-Deeps Gadhvi