फूंक मारकर हम दिए को बुझा सकते है पर अगरबत्ती को नहीं,
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क्योंकि जो महकता है उसे कौन बुझा सकता है...और जो जलता है वह खुद बुझ जाता है। तो क्या बन्नहे वो आपके हाथ में हे
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ज्यादा जल्नेसे अच्छा हे की खुद महको और दूसरोंको अपनी सुगंध से सुगंधित करो।
वरना खुद ही बुज़ जाओगे।

"તેજ "

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