હું છું જ રોમેન્ટિક તમે?

बदले हुए से उनके, अंदाज़ देखते हैं ।
कब तक रहेंगे हम से, नाराज़ देखते हैं ।

इतनी सजा मिलेगी, सच बोलने की हमको ,
दुश्मन की तरह अब तो हमराज देखते हैं ।
अरमाँ मचल रहे हैं, फ़िर भी सँभल रहे हम ,
दीदार को तुम्हारे, मोहताज़ देखते हैं ।

छिटकी ये चाँदनी भी, लगती है धूप तीख़ी ,
सहमे से आज सारे, सुर साज देखते हैं ।
वो आसमाँ को छू लें, हम भी तो चाहते ये ,
बेशक़ हमें फ़क़त वो, मेराज देखते हैं।

सब कुछ करा रहा है,आता नहीं नजऱ वह,
देता कहाँ से हमको, आवाज़ देखते हैं ।

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इस दुनिया के
लोग भी कितने
अजीब है ना ;
सारे खिलौने
छोड़ कर
जज़बातों से
खेलते हैं……..

બસ હસ્તા મુખે કૈ'ને કે પરવા જ નથી તને મારી,
આમ રડતી આંખો વિખૂટી પાડવી એ કયાંનો ન્યાય ?

હસતી આંખો અને રડતું દિલ,
ક્યારેક જીવલેણ બની જાય છે.

कुछ मिलता नहिं तेरी यादों को चूह लेने से,
बस मिलती है आँसू की सौगात चूह लेने से ।

कुछ आसान सवाल पूछ ,
बार बार मेरा , हाल ना पूछ.....!!

ये काम दोनों तरफ हुआ है,
उसे भी आदत पड़ी है मेरी...!!!

हमारी मुस्कुराहट पर न जाना
दिया तो क़ब्र पर भी जल रहा है

તમે જો નિષ્ફળતા માટે તૈયાર નથી તો ચમત્કારો પણ તમારા માટે નથી.

ફરી ફરીને આ પીડા પાછી ફરી છે.
એકલતાની સવારી આવી ચઢી છે